आपना हरयाण
आपना हरयाणा आओ म वादा करता हु ,तुमारी कुछ यादें ताज़ा करता हु आगये तोह देख क जईओ जीससा अवगा हाथ म ह मैरे ताश ,हरयाणा स सब त खास मेसा गेल प्यार था गेल नाहन म न्यारा इ स्वाद था | बचपन म क्या की न टेंशन थी सब न बेरा न क लोभ भाग्या र हरयाणा न pubg खा गया र बारिश क बाद का टेम भान र बहाई का प्यार था बास मिलन का इंतज़ार था बालक न रोंदा चुप करा दिया करती एक थापड़ म इ सुआ दिए करती लोगा का आपस म प्यार था जब्बे तोह सुखी महरा संसार था उस टाइम के खेल निराले थे र थम न के सुनाऊ खेता की हवा के कुकर सुआद दुवाउ गात म हाँगा था...